इलाहबाद उच्च न्यायालय ने कहा,वैज्ञानिक सबूत नहीं थे , इसलिए भारी मन और गहरे दर्द के साथ बलात्कार और हत्यारोपी क़ो ज़मानत दे दी है।
अदालत ने कहा, “…ज्यादातर रेप के मामलों में फॉरेन्सिक लैब की रिपोर्ट से पता चलता है कि DNA प्रोफाइल के अधूरे निर्माण के कारण, पीड़िता के योनि स्वाब में पाए गए DNA के स्रोत का निर्धारण नहीं किया जा सकता है।”अदालत ने शायद नाराज़गी जताते हुए 21 मई के अपने आदेश में कहा था कि , FSL में पुरानी मशीनें और बेकार बुनियादी ढांचा DNA प्रोफाइल तैयार न होने का मुख्य कारण है और इसके लिए राज्य सरकार के अलावा किसी और को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जिसके पास FSL को बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराने के अलावा भी कई अन्य मुद्दे हैं, वरना वो फोरेन्सिक लैब क़ो मज़बूत करती, पर उसे और ज़रूरी मुद्दों पर विचार करना है।