इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत दिल्ली विश्वविद्यालय की 24 वर्षीय कानून की छात्रा और कार्यकर्ता आकृति चौधरी की हिरासत को रद्द कर दिया और नोएडा की DM मेधा रूपम और अन्य अधिकारियों के वेतन से 5 लाख रुपये मुआवजे के रूप में वसूले जाने का आदेश दिया।
जस्टिस अतुल श्रीधरन की पीठ ने कहा कि तानाशाह अधिकारी उत्तर प्रदेश को ‘ऑरवेलियन डिस्टोपिया’ में बदल देंगे।
न्यायालय ने चेतावनी दी कि जब नौकरशाह और पुलिस अधिकारी अपनी शपथ की अवहेलना करते हैं और उसके विपरीत कार्य करते हैं, तो लोग उन्हें “ब्रिटिश साम्राज्य का एक दमनकारी अवशेष” मान सकते हैं, जिससे नागरिक अशांति का माहौल पैदा हो सकता है। पीठ ने आगे कहा कि “अधिक समय नहीं लगेगा जब नौकरशाही में मौजूद भ्रष्ट लोग उत्तर प्रदेश राज्य को एक ऑरवेलियन डिस्टोपिया में तब्दील कर देंगे”। न्यायालय ने यह भी कहा कि पर्याप्त कारण या उचित प्रक्रिया के बिना नागरिक स्वतंत्रता पर अतिक्रमण करने वाली ज्यादतियों या अवैधताओं को ठीक करते समय, न्यायपालिका पीड़ित नागरिकों को मुआवजा देने के लिए “कठोर आदेश” पारित कर सकती है।