आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत वैश्विक स्तर पर अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है, 2019 में इस बाज़ार में 2009 के मुकाबले 40 गुने की वृद्धि हुई उसी के साथ साथ इसी अवधि के दौरान भारत के पुरुषों और महिलाओं दोनों का मोटापा भी लगभग दोगुना हो गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मोटापे को “आनुवंशिकी, तंत्रिका जीव विज्ञान, खान-पान की आदतों, स्वस्थ आहार तक पहुंच, बाजार की शक्तियों और व्यापक पर्यावरण के बीच जटिल अंतःक्रियाओं से उत्पन्न होने वाली एक दीर्घकालिक, बार-बार होने वाली बीमारी” के रूप में वर्गीकृत करता है। वैश्विक स्तर पर, 1990 में 25% की तुलना में अब 43% वयस्क अधिक वजन वाले हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि 2021 में, सामान्य से अधिक बीएमआई के कारण हृदय रोग, मधुमेह, कैंसर, तंत्रिका संबंधी विकार, पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियां और पाचन संबंधी विकार जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों (NCD) से अनुमानित 37 लाख मौतें हुईं। भारत के 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में अस्वास्थ्यकर आहार, गतिहीन जीवनशैली और अति-प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन को इसके प्रमुख कारणों के रूप में बताया गया है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण ( NFHS-6 ) के छठे दौर के अनुसार, भारत में 15 से 49 वर्ष की आयु के पुरुषों और महिलाओं का वह अनुपात जो अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, लगभग 10 प्रतिशत अंक बढ़ गया।